
अनदेखे नायक हमारे आसपास हर दिन मौजूद होते हैं, लेकिन हम अक्सर उन्हें देख नहीं पाते। इनमें सबसे बड़े उदाहरण हैं प्रोफेशनल ड्राइवर – जो दिन-रात सड़क पर रहकर हमारी ज़िंदगी आसान बनाते हैं
हममें से अधिकांश के लिए रविवार या नेशनल हॉलीडे का मतलब होता है अपने परिवार के साथ आराम और मौज-मस्ती। बच्चे घर पर होते हैं, परिवार के सदस्य एक साथ बातें करते हैं, खाना खाते हैं और बाहर घूमने जाते हैं। लेकिन क्या कभी सोचा है कि हमारे प्रोफेशनल कार, बस और ट्रक ड्राइवरों की ज़िंदगी कैसी होती है? क्या उन्हें भी हर रविवार या छुट्टी पर आराम मिलता है?
जवाब है—ज़्यादातर नहीं।
परिवार और छुट्टियों से दूरी

भारत में लगभग 90% ट्रक ड्राइवरों को सप्ताहांत या त्योहारों पर छुट्टी नहीं मिलती (SaveLIFE Foundation, 2022)। सरकारी या प्राइवेट बस ड्राइवरों को छुट्टी कभी-कभी मिलती है, लेकिन उसका कोई निश्चित पैटर्न नहीं होता—कभी सोमवार, कभी बुधवार।
इसका सीधा मतलब यह है कि जब उनके परिवार के सदस्य अपने काम या स्कूल में व्यस्त होते हैं, तब ड्राइवर अपने छुट्टी के दिन अकेले रह जाते हैं। परिवार से दूरी और अकेलापन उनके लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
समय, थकान और नींद का संघर्ष
कई प्रोफेशन ऐसे होते हैं जहां काम का कोई निश्चित समय नहीं होता—जैसे ड्राइवर, लोको पायलट, एयरलाइन पायलट या होटल कर्मचारी। इन सबको दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है और परिवार से दूर रहना उनकी मजबूरी बन जाती है।
प्रोफेशनल ड्राइवरों के लिए थकान और नींद की कमी सबसे बड़ा खतरा है। Ministry of Road Transport & Highways (MoRTH, 2023) के अनुसार, भारत में लगभग 40% सड़क दुर्घटनाएं ड्राइवर की थकान या नींद की कमी की वजह से होती हैं।
सबसे जोखिम भरा समय सुबह 3 से 5 बजे के बीच होता है, जब शरीर की जैविक घड़ी आराम की मांग करती है। लेकिन ट्रक ड्राइवरों को इसी समय लंबी और भारी ड्राइव करनी पड़ती है।
स्वास्थ्य और मानसिक तनाव की बड़ी चुनौती
AIIMS और ICMR के अध्ययन बताते हैं कि लगभग 65% प्रोफेशनल ड्राइवर तनाव और हाई ब्लड प्रेशर से जूझते हैं।
PPHF (2023) की रिपोर्ट में यह सामने आया कि 75% ट्रक ड्राइवरों को शारीरिक बीमारियां हैं—पीठ दर्द, मोटापा, जोड़ों का दर्द, हाई बीपी और मानसिक तनाव।
Castrol India और Kantar IMRB (2018) के अनुसार, 53% ड्राइवर मानसिक और शारीरिक तनाव से प्रभावित हैं।
इतना ही नहीं, ड्राइवरों की सामाजिक सुरक्षा भी बेहद कमजोर है। हेल्थ चेकअप करवाने वाले ड्राइवरों की संख्या बहुत कम है। Asia-Africa Supply Chain Study के मुताबिक, 98% ट्रक ड्राइवर अपने बच्चों को इस पेशे में आने की सलाह नहीं देते। कारण है—यह काम कठिनाइयों से भरा है, इसमें सम्मान की कमी है और स्वास्थ्य पर लगातार असर पड़ता है।
समाज में सम्मान की कमी
ड्राइवरों का काम अक्सर समाज में कम दर्जे का समझा जाता है, खासकर ट्रक ड्राइवरों का। उन्हें लगातार पुलिस और अधिकारियों की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जबकि सच यह है कि देश की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन इन्हीं ड्राइवरों की बदौलत चलती है। वे हमारे लिए दिन-रात सड़कों पर रहते हैं, लेकिन उन्हें न सम्मान मिलता है न सुरक्षा।
अनदेखे नायक और हमारी जिम्मेदारी: बदलाव की दिशा में
अब सवाल है—हम क्या कर सकते हैं?
- लंबी ट्रिप्स और लगातार रात की ड्राइविंग को कम किया जाए ताकि ड्राइवरों को पर्याप्त आराम मिल सके।
- उनके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ और सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
- समाज को उनके प्रति सम्मान और सहानुभूति दिखानी चाहिए।
- सरकार और उद्योगों को मिलकर ड्राइवरों के कार्यकाल, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर ठोस नीतियाँ बनानी चाहिए।
- उपभोक्ताओं को भी ऐसे ब्रांड चुनने चाहिए जो ड्राइवरों के हित में काम करते हों।
👉 एक छोटा-सा सुझाव: अगर रविवार की रात को माल ढुलाई रोकी जाए और ड्राइवरों को परिवार के साथ समय बिताने दिया जाए, तो यह उनके जीवन में बड़ा फर्क ला सकता है।
निष्कर्ष
प्रोफेशनल ड्राइवर सिर्फ गाड़ियों के पीछे बैठे लोग नहीं हैं, बल्कि वे हमारी अर्थव्यवस्था और रोज़मर्रा की जिंदगी को चलाने वाले अनदेखे नायक हैं। उनकी जिंदगी कठिन है, चुनौतियों से भरी है और अक्सर समाज द्वारा अनदेखी की जाती है।
अब समय है कि हम उनके संघर्ष को पहचानें, उनका सम्मान करें और उनके लिए ठोस कदम उठाएँ।
👉 इस लेख को साझा करें ताकि और लोग भी समझें कि जिनकी मंज़िल हमें तक पहुँचानी है, उनकी अपनी ज़िंदगी कितनी कठिन और अनदेखी है।
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