सर एम. विश्वेश्वरैया : भारत के इंजीनियरिंग मास्टरमाइंड और उनके 6 महान प्रोजेक्ट्स

सर एम. विश्वेश्वरैया का स्केच पोर्ट्रेट, पारंपरिक मैसूर पगड़ी और सूट में

भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया (1861–1962) सिर्फ़ एक इंजीनियर नहीं थे, बल्कि भारत के Master Planner थे। उनकी इंजीनियरिंग दूरदृष्टि, प्रशासनिक क्षमता और ईमानदारी ने भारत के विकास की दिशा ही बदल दी।
इंजीनियर्स डे (15 सितम्बर) उनके योगदान को याद करने का दिन है। आज हम उनके छह महान प्रोजेक्ट्स और विज़न पर नज़र डालते हैं, जो उनकी सोच और तकनीकी प्रतिभा के प्रतीक हैं और आज भी सक्रिय हैं।

1. सर एम. विश्वेश्वरैया और कृष्णराज सागर (KRS) डैम – जल संसाधन प्रबंधन का करिश्मा

कृष्णराज सागर (KRS) डैम, कावेरी नदी पर बना ऐतिहासिक बांध, जिसमें स्पिलवे से पानी बहता हुआ दिखाई दे रहा है
  • स्थान: कावेरी नदी, मैसूर (कर्नाटक)
  • निर्माण काल: 1911–1931
  • ख़ासियत: उस समय एशिया का सबसे बड़ा जलाशय

KRS डैम का निर्माण उस दौर में हुआ जब आधुनिक मशीनें और टेक्नोलॉजी सीमित थीं। इसके बावजूद विश्वेश्वरैया जी ने “Automatic Sluice Gates” का डिज़ाइन किया, जो उस समय के लिए विश्व स्तर पर अद्वितीय था।

👉 महत्व:

  • मैसूर और मंड्या की लाखों एकड़ ज़मीन आज भी इससे सिंचित होती है।
  • बेंगलुरु और मैसूर शहर की जल आपूर्ति इसी पर निर्भर है।
  • ब्रिंदावन गार्डन जैसा आकर्षण इसी डैम के कारण विकसित हुआ।

2. भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स – औद्योगिकीकरण की नींव

भद्रावती स्थित विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील प्लांट का दृश्य, पीछे फैक्ट्री की इमारतें और चिमनियाँ दिखाई दे रही हैं

उस दौर में भारत विदेशी स्टील पर निर्भर था। विश्वेश्वरैया जी ने महसूस किया कि यदि भारत को आत्मनिर्भर बनना है तो स्टील उद्योग की नींव मज़बूत करनी होगी।

👉 महत्व:

  • यह संयंत्र भारत के औद्योगिकीकरण की पहली ठोस कोशिशों में से एक था।
  • रेलवे, निर्माण और रक्षा क्षेत्र को स्टील उपलब्ध कराया।
  • आज भी यह संयंत्र SAIL के अधीन कार्यरत है और देश के स्टील उत्पादन में योगदान देता है।

3. हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT) – भारत का इंडस्ट्रियल ब्रांड

हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT) फैक्ट्री का मुख्य भवन और प्रवेश द्वार, सामने बोर्ड पर HMT का लोगो
  • स्थापना: 1953 (उनके सुझाव पर)
  • उद्देश्य: मशीन टूल्स और घड़ियों का स्वदेशी उत्पादन

HMT ने भारतीय इंडस्ट्री को मशीन टूल्स में आत्मनिर्भर बनाया। “HMT घड़ी” हर मध्यमवर्गीय परिवार की शान हुआ करती थी।

👉 महत्व:

  • भारत में मैन्युफैक्चरिंग क्रांति की शुरुआत यहीं से हुई।
  • ऑटोमोबाइल और इंडस्ट्रियल सेक्टर को नई गति मिली।
  • आज भी HMT मशीन टूल्स इंजीनियरिंग क्षेत्र का मानक माना जाता है।

4. मैसूर विश्वविद्यालय – शिक्षा और तकनीकी विकास का आधार

मैसूर विश्वविद्यालय का क्रॉफर्ड हॉल भवन, सफेद स्तंभों और लाल गुंबद के साथ
  • स्थापना: 1916
  • विशेषता: भारत के पहले प्रादेशिक विश्वविद्यालयों में से एक

विश्वेश्वरैया जी का मानना था कि तकनीकी और औद्योगिक विकास शिक्षा के बिना अधूरा है। इसलिए उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई।

👉 महत्व:

  • इसने दक्षिण भारत में उच्च शिक्षा और रिसर्च को नई दिशा दी।
  • इंजीनियरिंग, विज्ञान और मैनेजमेंट में हजारों छात्रों को अवसर मिला।
  • आज भी यह विश्वविद्यालय भारत के श्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है।

5. बेंगलुरु का आधुनिक जल और ड्रेनेज सिस्टम – शहरी इंजीनियरिंग का उदाहरण

बेंगलुरु शहर का आधुनिक जल आपूर्ति और ड्रेनेज सिस्टम, पानी की टंकी और भूमिगत पाइपलाइन के चित्रण के साथ

1909–1912 के बीच विश्वेश्वरैया जी ने बेंगलुरु के लिए Water Supply और Drainage System डिज़ाइन किया। उस समय शहर तेजी से बढ़ रहा था और साफ पानी व स्वच्छता सबसे बड़ी चुनौती थी।

👉 महत्व:

  • जल संरक्षण और वितरण का वैज्ञानिक मॉडल प्रस्तुत किया।
  • बेंगलुरु का “गार्डन सिटी” बनना इन्हीं योजनाओं से संभव हुआ।
  • आज भी शहर का जलापूर्ति तंत्र उनकी सोच पर आधारित है।

6. शरावती नदी और – ऊर्जा का नया अध्याय

शरावती नदी पर जोग फॉल्स के पास स्थित जोगा हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन, पीछे झरना और हरी-भरी पहाड़ियाँ

सर विश्वेश्वरैया जब शरावती नदी के जोग फॉल्स (Gersoppa Falls) गए, तो उन्होंने उस प्रचंड जलधारा को देखा और कहा –
👉 “What a great waste it is!”
(कितना बड़ा अपव्यय है यह पानी यूँ ही गिर जाना!)

उनकी दूरदर्शिता ने इस प्राकृतिक संसाधन को “ऊर्जा” में बदलने का विचार दिया।

शरावती जलविद्युत परियोजना (Sharavathi Hydroelectric Project)

  • स्थान: जोग फॉल्स, शिमोगा ज़िला, कर्नाटक
  • स्थापना: 1940s–1960s (उनकी सोच पर आधारित)
  • क्षमता: ~1035 MW

👉 महत्व:

  • कर्नाटक का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर स्टेशन बना।
  • दक्षिण भारत में बिजली उत्पादन की रीढ़ बना।
  • उद्योगों और शहरों को ऊर्जा उपलब्ध कराने में आज भी सक्रिय है।

यह घटना दिखाती है कि विश्वेश्वरैया जी किसी भी प्राकृतिक धरोहर को सिर्फ़ दृश्य के रूप में नहीं, बल्कि विकास की संभावना के रूप में देखते थे।

सर विश्वेश्वरैया का इंजीनियरिंग दर्शन

  • उनका मानना था कि इंजीनियर का काम केवल संरचना बनाना नहीं, बल्कि राष्ट्र की दिशा तय करना है।
  • वे तकनीकी नवाचार को सस्टेनेबल डेवलपमेंट” से जोड़कर देखते थे।
  • उनके प्रोजेक्ट्स यह साबित करते हैं कि विज़न + ईमानदारी = अमर इंजीनियरिंग

यादगार घटनाएँ

  • ईमानदारी की मिसाल: एक बार निजी डाक टिकट का खर्च गलती से सरकारी खाते से हुआ। पता चलते ही उन्होंने दोगुनी राशि अपनी जेब से जमा कराई।
  • समय का महत्व: वे कहा करते थे – देर से आना केवल व्यक्ति का नुकसान नहीं, बल्कि राष्ट्र की हानि है।”
  • देश सेवा: 90 वर्ष की उम्र में भी वे सक्रिय थे और कहते थे – जब तक शरीर साथ दे रहा है, मैं देश की सेवा करता रहूँगा।”

आज की पीढ़ी के लिए संदेश

सर विश्वेश्वरैया हमें यह सिखाते हैं कि –

  • Innovation तभी सार्थक है जब वह समाज को लाभ दे।
  • अनुशासन और ईमानदारी इंजीनियरिंग से भी अधिक महत्वपूर्ण गुण हैं।
  • इंजीनियर को सिर्फ़ टेक्निकल प्रोफेशनल नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता होना चाहिए।

निष्कर्ष

सर एम. विश्वेश्वरैया को सही मायनों में The Great Engineer & Visionary Man of India कहा जा सकता है।
उनके छह महान प्रोजेक्ट्स आज भी जीवित हैं और यह संदेश देते हैं कि सच्ची इंजीनियरिंग वही है जो पीढ़ियों तक टिके और समाज के हर वर्ग को लाभ पहुँचाए।

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