आज की भाग-दौड़ भरी दुनिया में Deforestation (वनों की कटाई) सबसे बड़ी विडंबना बन गई है। हमने अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए जंगलों को काटा, जिससे हमारे शहरों का रंग तेज़ी से Green to Grey में बदल गया है।
इस विनाश ने वन्यजीवों को बेघर कर दिया है और हमें साफ़ हवा से भी दूर कर दिया है। हमारी ‘विचित्र’ सीरीज़ की 5 इमेजेस दिखाती हैं कि प्रकृति को नष्ट करने की कीमत हम कैसे चुका रहे हैं।
हाईवे: हरियाली से कंक्रीट के जंगल तक

एक समय था जब सड़कों पर सफ़र करना भी प्रकृति के बीच सैर करने जैसा अनुभव होता था। आज के हाइवे और एक्सप्रेसवे, विकास का प्रतीक तो हैं, लेकिन उन्होंने हमें हमारे असली हरे-भरे साथियों से दूर कर दिया है।
यह पहली इमेज साफ़ दिखाती है कि कैसे हमारा देश तेज़ी से Green to Grey के सफर पर निकल चुका है, जहाँ पेड़-पौधों की जगह केवल सूखा कंक्रीट ही दिखता है।
🐒 बेघर वन्यजीव: मोबाइल टावर पर नए ‘किरायेदार’

जब जंगल कटते हैं, तो वहाँ रहने वाले वन्यजीव कहाँ जाएँगे? कभी हरे-भरे पेड़ों पर आराम फरमाने वाले बंदर अब मजबूरी में ऊँचे मोबाइल टावरों को अपना नया ठिकाना बना रहे हैं। यह विडंबना साफ दर्शाती है कि हमारा Green to Grey का बदलाव जानवरों के घरों को कैसे उजाड़ रहा है।
🌾 खेतों का बदला रंग: फसल या पावर प्लांट?

जहाँ कभी किसान हरी-भरी सब्ज़ियाँ उगाते थे, आज उस ज़मीन पर बड़े-बड़े सोलर पैनल और विंड टर्बाइन लग रहे हैं। हमें स्वच्छ ऊर्जा चाहिए, लेकिन क्या यह कृषि की कीमत पर होनी चाहिए? यह इमेज साफ दिखाती है कि कैसे हमारा भोजन पैदा करने वाला Green to Grey का क्षेत्र, अब केवल ऊर्जा उत्पादन का मैदान बन गया है।
🐆 जंगल से बेदखल: जब तेंदुआ आपके घर आए

यह शायद वनों की कटाई का सबसे डरावना और सीधा परिणाम है, जिसे अक्सर हम ख़बरों में देखते हैं। जब हमने जंगल काटे, तो हमने जानवरों से उनका घर छीन लिया।
अब वे कहाँ जाएँगे? यह विडंबनात्मक इमेज दिखाती है कि कैसे हमारा Green to Grey में बदलता शहर, चीते को मजबूरन आपके लिविंग रूम में ले आया है। ‘Plot twist: My jungle became your living room.’
💨 शुद्ध हवा की कीमत: एयर प्यूरीफायर पर निर्भरता

वनों की कटाई ने हमें केवल वन्यजीवों से ही दूर नहीं किया, बल्कि हमसे साफ़ हवा भी छीन ली है। जिस हवा को हम कभी मुफ़्त में साँस लेते थे, आज वह एक महंगा गैजेट बन गई है। यह अंतिम विडंबनात्मक इमेज दिखाती है कि कैसे हमने प्रकृति के दिए Green को काटकर, अपने जीवन को Grey प्रदूषण से भर लिया है, और अब हम मशीन पर निर्भर हैं।
🎲 पल भर का लाभ, सदियों का नुकसान
यह पाँच विडंबनाएँ उस मानव प्रगति का आईना हैं जिसे हमने ‘विकास’ नाम दिया। क्षणिक लाभ और कुछ ही दशकों के आराम के लिए, हमने सदियों पुरानी प्राकृतिक व्यवस्था को नष्ट कर दिया।
हमने अपने बच्चों के लिए साफ़ हवा या सुरक्षित घर नहीं, बल्कि प्रदूषित भविष्य की नींव रखी। from green to grey का यह विनाशकारी बदलाव दिखाता है कि हमने खुद अपने भविष्य के साथ कितना बड़ा जुआ खेला है, जिसका खामियाजा अब सबको चुकाना पड़ रहा है।
🛑 निष्कर्ष: हमें कहाँ रुकना है?
इन पाँच ‘विचित्र’ इमेजेस के माध्यम से हमने देखा कि Deforestation का परिणाम कितना गहरा है। Green to Grey का यह सफर हमें सुविधाएँ तो दे रहा है, लेकिन इसकी कीमत हमारी हवा, हमारे वन्यजीवों के घर, और हमारी कृषि भूमि को चुकानी पड़ रही है। यह साफ़ है कि प्रगति का मतलब प्रकृति को पूरी तरह से खो देना नहीं होना चाहिए।
हमें अब जागरूक होना होगा और यह तय करना होगा कि विकास के नाम पर from green to grey का यह विनाशकारी बदलाव कहाँ जाकर रुकेगा। अपनी अगली पीढ़ी के लिए, हमें कंक्रीट के इस जंगल में हरियाली के लिए जगह बनानी ही होगी।
We gave an entire generation and air purifier, but where will they find the clean air that we got for free?
*an air purifier
We are searching pure air, water etc due to our faults
Super
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